हे प्रभु हमेशा निर्भय रहूँ यही विनती है आपसे | प्रार्थना | Sudhanshu ji Maharaj

हे प्रभु हमेशा निर्भय रहूँ यही विनती है आपसे | प्रार्थना | Sudhanshu ji Maharaj

हे प्रभु हमेशा निर्भय रहूँ यही विनती है आपसे

प्रार्थना

प्रेमपूर्वक सभी दोना हाथ जोड़िये। शान्त मन प्रेम पूर्ण ढ़ंग से ही अपनी आंखों को बन्द करलें परमात्मा के अनन्त प्रेम को हृदय में अनुभव कीजिए और आशीष मांगे ‘‘निर्भयता प्रदान कीजिये प्रभु’’ अहसास करें की निर्भयता का आशीष मिल रहा है। निर्भय हो रहा हूँ। निश्चिन्तता का आशीष दे भगवान, तथास्तु को सुने और निश्चिन्तता अनुभव करें।

मैं परम आनन्द की प्रार्थना करता हूँ

मैं परम आनन्द की कामना करता हूँ प्रभु, मन-मन में तथास्तु को सुनिये और अपने चारों ओर अपने भीतर परम आनन्द को अनुभव करें। अपने रोम-रोम में, हृदय में चेहरे पर आनन्द का भाव वही आनन्द जो फूलाें में मुस्कुराता है, बादलों से अभिषेक बनके बरसता है, वही जो नदियों में बहता है, वही जो सुनहरी किरणे बनकर सूरज से धरती पर आता हैै।

उसे महशूस कीजिये। सबको सुरक्षित करने वाले, रक्षा करने वाले परमात्मा, सुरक्षा का आशीष मागता हूँ आपसे। सुरक्षित जीवन, तथास्तु को अनुभव कीजिये और स्वयं को परमात्मा के दोनों हाथाें में, हजारों हाथों में सुरक्षित अनुभव करें। वह सम्भाले हुए है मेरा रक्षक, मेरा सब कुछ मेरा प्रभु तू हर पल मेरे संग है।

सुख समृद्धि की कामना कीजिये

एहसास कीजिये, सुख समृद्धि की प्रार्थना कीजिये और समृद्धि की किरणों को अपने माथे पर महसूस करें मेरा सौभाग्य बढ़ रहा है। कर्म मुझे करना है, चिड़िया का दना पानी तो रख दिया गया है। बस उसे जाकर वहां से स्वयं खाना है।

अपना पानी स्वयं पीना है सबका भोजन सब जगह है थोड़े हाथ पांव चलाइये वहां तक पहुचिये और खाइये क्योंकि इतना वो नहीं करेगा कि आपके घोसले में आकर आपके मुख में डाल कर जाये उसकी कृपा को अनुभव कीजिये। मन-मन में धन्यवाद दीजिये कि मेरा जीवन तेरी कृपा के कारण सुरक्षित है तू सम्भाले हुए है मैं आभारी हूँ भगवान बारम्बार धन्यवाद धन्यवाद धन्यवाद ।

ओम् शान्तिः शान्तिः शान्तिः ओम्

मुश्किलों का सामना कैसे करें?

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