हे ज्योतिर्मय! हे शुद्ध, बुद्ध, मुक्त स्वभाव ! हमारा प्रणाम स्वीकार करें!

हे ज्योतिर्मय! हे शुद्ध, बुद्ध, मुक्त स्वभाव ! हमारा प्रणाम स्वीकार करें!

हे ज्योतिर्मय! हे शुद्ध, बुद्ध, मुक्त स्वभाव ! हमारा प्रणाम स्वीकार करें!

प्रार्थना

हे ज्योतिर्मय! हे शुद्ध, बुद्ध, मुक्त स्वभाव ! हमारा प्रणाम स्वीकार करें!
हे प्रभु! इस जीवन में अनेक आवश्यकताएं, इच्छाएं मनुष्य की जागती है, जिनके कारण मनुष्य इस संसार में तरह तरह के कर्म करता है, भटकता है, भ्रमित होता है, और दुःख भोगता है। जो इच्छा हमारी उन्नति कराएं, हमें आपका प्रेम दे सकें हमारे अंदर शांति आ सके , हम अपना और दूसरे का उद्धार कर सके , उस इच्छा शक्ति को आप हमें प्रदान कीजिये ।

हे प्रभु! आप हमें वो सुबुद्धि प्रदान कीजिये जिसके प्रकाश में हम उचित निर्णय लेकर उत्तम पथ पर अग्रसर हो सके ।
हे प्रभु ! ऐसी सुमति प्रदान कीजिये की हम अच्छे -बुरे का भेद कर सके और सत्कर्म की शक्ति हमारे अंदर बनी रहे।

हे नारायण ! आप ऐसी कृपा करें की जिससे जीवन के अंतिम भाग तक यह शरीर कर्मशील बना रहे , कर्मठ बना रहे , सेवा करता रहे, लेकिन सेवा कराए नहीं । सदैव चेहरे पर मुस्कान, माथे पर शीतलता, वाणी में माधुर्य बना रहे। हे दाता! इतनी धन समृद्धि प्रदान करना की ये हाथ कभी दूसरों के आगे फैले नहीं।

हे प्रभु! आँखों में ऐसी प्रेम दृष्टि देना जिससे की हम द्वेष और घृणा से ऊपर उठकर जी सके। हम कभी भी बैर के बीज को संसार में फैलाये नही। जंहाँ भी जाएं शान्ति की छाया – सुखद छाया चारो ओर फैला सकें।
ऐसा हमें आशीर्वाद प्रदान कीजिये। आपसे हमारी यही विनती है, इसे स्वीकार करें।

ॐ शांतिः ! शांतिः! शांतिः!

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