विश्व जागृति मिशन में समाये सेवामय सनातन मूल्यों के बीज | Sudhanshu Ji Maharaj

विश्व जागृति मिशन में समाये सेवामय सनातन मूल्यों के बीज | Sudhanshu Ji Maharaj

विश्व जागृति मिशन की स्थापना

विश्व जागृति मिशन में समाये सेवामय सनातन मूल्यों के बीज

विश्व जागृति मिशन से जुड़े हुए लाखों गुरुभक्त -शिष्यों के लिए रामनवमी का दिन एक सौभाग्यशाली दिन हैं, क्योंकि इसी दिन सद्गुरु द्वारा संकल्पित मानवीय सेवाओं के लिए विश्व जागृति मिशन की स्थापना हुई थी, जिसके लिए आप सभी को बहुत-बहुत बधाई।

वास्तव में जब-जब धर्म घटता है, धरती पीड़ा, दुख, कष्ट से भरती है, अराजकता फैलती है, तब-तब परमात्मा किसी न किसी रूप में अंशावतार लेता ही है, साथ में सूक्ष्म जगत की अनेक मुक्त आत्माओं में से किसी को अपनी सम्पूर्ण युगीन शक्तियां देकर उसे गुरुत्व से भरता और अपना प्रतिनिधि बनाकर सद्गुरु रूप में धरती पर भेजता है। इस प्रकार वह गुरु सत्ता मानव मात्र का दुख, कष्ट, पीड़ा मिटाकर समाज में सज्जनों के रहने लायक वातावरण बनाने और सुख, शांति, संतोष, आनन्द की स्थापना के लिए कार्य करती है।

विश्व जागृति मिशन की स्थापना

ठीक इसी तरह 31 वर्ष पूर्व चैत्र रामनवमी के दिन रविवार 24 मार्च, 1991 से सद्गुरुदेव के विश्व जागृति मिशन की समाज के पीड़ा-पतन निवारण हेतु आध्यात्मिक यात्रा प्रारम्भ होती है।

इस प्रकार पूज्य गुरुदेव ने मिशन के बैनर तले समाज में उन लोगों को राहत पहुँचाई, जिन्हें इसकी जरूरत थी। जन-जन के उत्थान के लिए समाज में सत्संग व ध्यान साधना का शुभारम्भ किया, जिसकी सख्या आज लगभग 7 हजार हो चुकी है। यह सत्संग यात्रा  जी-टी-वी-, आस्था, संस्कार, दिशा, साधना, सोनी चैनल के रास्ते चलते हुए आधुनिक समय की मांग को देखते हुए आज सोशल मीडिया के माध्यम से यू-ट्यूब, फेसबुक आदि चैनल द्वारा महाराजश्री के विचारों का प्रसार हो रहा है। वेद-उपनिषद-गीता-रामायण आदि आर्ष ग्रंथ एवं संतों की वाणियों पर आधारित इन प्रवचनों द्वारा देश-विदेश के करोड़ों व्यक्तियों ने जीवन निर्माण के सूत्र प्राप्त किये है।

पर्यावरण संवर्धन के लिए उठाये अनेक कदम

हिमालय में मनाली, गंगा तट के निकट ऋषिकेश, बद्रीनाथ तीर्थ धाम आदि में ध्यान-साधना शिविरों के साथ-साथ देश भर के मिशन शाखाओं पर पर्यावरण संवर्धन के लिए यज्ञ, वृक्षारोपड़ का आयोजन कराया। इसी प्रकार अनाथों के लिए अनाथाश्रम, शिक्षा के लिए स्कूल जैसे रुक्का-खूंटी में आदिवासियों के लिए विश्व जागृति मिशन आदिवासी पब्लिक स्कूल, कूड़ा बीनने वाले बच्चों के लिए फरीदाबाद में ज्ञानदीप विद्यालय, अनाथों के लिए सूरत में बालाश्रम एवं सनातन धर्म का जन-जन को संदेश देने के लिए कानपुर एवं आनन्दधाम में गुरुकुल विद्यापीठ की स्थापनायें कीं।

चिकित्सा एवं स्वस्थ्य से सम्भंदित अनेक कार्य

इसी प्रकार इस मिशन ने स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए जगह-जगह रक्तदान एवं नेत्रदान शिविर, कृत्रिम अंग दान एवं गरीबों के लिए फरीदाबाद में आरोग्धाम धर्मार्थ चिकित्सालय तथा आनन्दधाम आश्रम में करुणा सिन्धु धर्मार्थ अस्पताल की स्थापना की। जिसमें फरीदाबाद में अब तक 10 लाख से अधिक एवं करुणा सिन्धु धर्मार्थ अस्पताल में 16 लाख से अधिक रोगियों का निःशुल्क उपचार किया जा चुका है। देश के लगभग 40 स्थानों पर सत्संग भवन, सामुदायिक भवन, मंदिर एवं आश्रमों की स्थापनायें की गयी, जो कि व्यक्ति निर्माण के लिए प्रयोगशालाओं का कार्य कर रही है।

दैविक आपदा में किया जन कल्याण

दैविक आपदा के रूप में मिशन ने रोहतक, हरियाणा, दिल्ली राजधानी में बाढ़, गुजरात एवं देहरादून भूकम्प से प्रभावित, आंध्रप्रदेश में सुनामी से प्रभावित मछुआरों के लिए पक्के घरों का निर्माण करवाकर दिया।

रैगिंग को असंवैधानिक अपराध घोषित करवाया

समाज में फैली अनेक बुराइयों जैसे स्कूल-कॉलेज में रैगिंग प्रथा में सुधार के लिए याचिका दायर कर इसे असंवैधानिक अपराध घोषित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

घर-परिवार में वृद्धजनों के खोये सम्मान को पुनः वापस दिलाने के लिए 2 अक्टूबर को श्रद्धापर्व मनाने का अभियान प्रारम्भ किया। इसके महत्व को देखते हुए आज देश-विदेश में यह त्योहार भाव भरे वातावरण में मनाया जाता है। जिसमें वृद्धजनों को सम्मानित करने के साथ-साथ बच्चों को संदेश दिया जाता है कि बुजुर्ग घर की अमूल्य निधि हैं। जिनका तिरस्कार न करके उन्हें उचित सम्मान दिया जाना चाहिए।

महिला उथान के लिए विशेष कार्य

इसी प्रकार मिशन द्वारा महिलाओं के उत्थान के लिए फरीदाबाद में कौशल विकास केन्द्र की स्थापना की गयी, जहां महिलाओं का न केवल कौशल विकास किया जाता है, अपितु उनके लिए नौकरियां के इंतजाम भी किये जाते हैं।

हिन्दू धर्म एवं भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार

आज मिशन द्वारा हिन्दू धर्म एवं भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार व्यापक स्तर पर किया जा रहा है, जो  न केवल अमेरिका, जहां पूर्व में स्वामी विवेकानन्द ने ऐतिहासिक भाषण दिया था, बल्कि खाड़ी देशो जैसे दुबई व मस्कट, अफ्रीकी देश लॉगोस आदि में भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार होना शामिल है। मिशन ने विदेशों में रह रहे हिन्दुओं को अपने धर्म पर टिके रहने हेतु सकारात्मक वातावरण तैयार किया।

मिशन ने कई जन के दुख-दर्द मिटाये

सेवा-साधना के प्रकल्पों से निर्मित इस विराट मिशन से आज करोड़ों लोगों के दुख-दर्द मिट रहे हैं। जन-जन के सुख-शांति-आनन्द-सौभाग्य के द्वार खुल रहे हैं। ‘‘वास्तव में अपने इस मिशन अभियान को गुरु की करुणामयी पीड़ा की उपज कह सकते हैं।

2 मई को पूज्यवर के जन्मदिन रूप में उल्लासपर्व के साथ विश्व जागृति मिशन के स्थापना दिवस के रूप में भी मनाया जा रहा है। निश्चित ही ये क्षण गुरुभक्तों, मिशन साधकों के अंतःकरण में नव ऊर्जा का संचार करेंगे। करोड़ों गुरुभक्त अपनी श्रद्धा अपने गुरुदेव व उनके मिशन के प्रति समर्पित करने हेतु हर्षोल्लासपूर्वक हाथ बढ़ायें और गुरु आशीर्वाद पायें। विश्व जागृति मिशन स्थापना दिवस एवं उल्लासपर्व की सभी गुरुभक्तों को पुनः बधाई एवं आमंत्रण।

टीम-

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