राष्ट्र को एक व अखण्ड रखने की ज़रूरत

राष्ट्र को एक व अखण्ड रखने की ज़रूरत

Need-to-keep-the-nation-one | Sudhanshuji Maharaj

सबकी प्रार्थनायें एक ही परमेश्वर तक पहुँचती हैं, ईश्वर चाहता है सब एक रहें

देहरादून, 28 सितंबर। विश्व जागृति मिशन द्वारा यहां परेड ग्राउंड (महात्मा गांधी प्रांगण) में विराट भक्ति सत्संग महोत्सव के दूसरे दिवस सन्ध्याकाल द्रोणनगरी के इस अंचल में दिव्य भावों का अद्भुत संचार हो उठा। सत्संग समारोह में हजारों की संख्या में उत्तराखंडवासी सम्मिलित हुए। पड़ोसी राज्यों के ज्ञान-जिज्ञासु भी देहरादून पहुंच रहे हैं।

विश्व जागृति मिशन के देहरादून मंडल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में संस्थाध्यक्ष सन्तश्री सुधांशु जी महाराज ने इन दिनों राष्ट्र की एकता, समरसता एवं अखंडता के लिए विशेष काम करने की जरूरत बतायी। उन्होंने वेद सूक्ति “एकं विप्रा बहुधा वदन्ति” की विस्तृत व्याख्या की और कहा कि हम सब एक ही ईश्वर की संतान हैं। हम सबका पिता एक है। सारी प्रार्थनाएँ उसी एक परमेश्वर तक पहुंचती है। वह चाहता है कि उसकी सभी संतानें एक होकर रहें। हम अपनी-अपनी उपासना पद्धति के माध्यम से जिस ईश्वर की आराधना करते हैं, उसका सजदा करते हैं, वह अपने बच्चों को आपस में लड़ते-झगड़ते देखकर बड़ा कष्ट पाता है। श्रद्धेय महाराजश्री ने सभी से एक होकर रहने का आहवान देशवासियों से किया।

विश्व जागृति मिशन प्रमुख ने घटते वनीय क्षेत्र पर चिंता जताई और कहा कि 30 प्रतिशत की जरुरत के विरुद्ध केवल 13 प्रतिशत वन हमारे देश में हैं, उनमें भी हो रही घटोत्तरी वास्तव में चिंताजनक है। उन्होंने हरीतिमा संवर्द्धन के लिए तेज़ी से काम करने और मां भारती को हरी चुनरिया ओढ़ाने की अपील सभी से की।

सत्संग शुभारम्भ के पहले आचार्य महेश शर्मा, आचार्य अनिल झा, महेश सैनी, राम बिहारी एवं कश्मीरी लाल चुग के भजनों का लाभ उपस्थित जनसमुदाय ने उठाया। सत्संग महासभा का संचालन एवं मंचीय समन्वयन नई दिल्ली से आए विश्व जागृति मिशन के निदेशक श्री राम महेश मिश्र ने किया।

इसके पूर्व मिशन के देहरादून प्रधान श्री सुधीर शर्मा के नेतृत्व में प्रमुख यजमान टोली ने विधि-विधान से व्यास पूजन किया। सत्संग महोत्सव का सम्पूर्ण संयोजन विश्व जागृति मिशन के केन्द्रीय अधिकारी श्री मनोज शास्त्री ने किया।

2 Comments

  1. We have forgotten our true identity and have thus moved away from our one parampita. The earlier we realise this, the better it is!

  2. L.k. Vishwakrma says:

    Hari om ji.